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@@ जीवन संगिनी @@

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 17, 2017

तुमको देख कर ,मुझे मुस्कुराना आ गया
जीवन में मेरे अंधकार था, उजाला आ गया
चला जा रहा था ,न जाने कौन सी डगर पर
तुमको पाकर जीवन मेरा संवरता चला गया !!

लाख कोशिश की थी, मैने अपनी राह पकडने की
पर वो धरातल न मिल सका ,जिन्दगी को मेरे
वो शायद जिन्दगी का खास ,लम्हा था मेरे लिए
जिस में तुम को मैं, पाकर सजता चला गया !!

विधि का विधान ही कुछ ऐसा था, औ मेरे सनम
एक डोर को बंधने में समां ,पास आता चला गया
हो गयी दो आत्मा ,एक दूजे के पास इस तरह
दो बिछडे हुए दिलो का समां मिलाता चला गया !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

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