मुक्तक · Reading time: 1 minute

जीवन लीला

जीवन – लीला रहे अधूरी सुख – दुख के संयोग बिना ..

प्रीति कहाँ हो पाती पूरी कुछ दिन विरह वियोग बिना..

खट्टे – मीठे सभी स्वाद से सजी गृहस्थी की थाली ..

पार कहाँ लगती है नैया आपस के सहयोग बिना ..

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शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका…
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