Oct 20, 2020 · कविता
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जीवन रश्मि

जीवन रश्मि अब अपना रथ हांको
बह गये हिमकण अश्रु उन्हें आको
अब अपने नव जीवन को झांको
रह गया अगर संशय उसे त्यागो
कुछ और नहीं बस अब मानो
रह गया अधूरा जो तप है ठानो

इस धरा से गगन की ओर देखो
है रुख पवन का किस ओर देखो
राह अपनी स्वयं बनाकर जानो
शूल से आघातों से पार चलो
कुछ और नहीं सुनहरा पल देखो
आशाओं के पार नया मंजर देखो

जीवन में अनुभवों का कद देखो
विचलित मन का तुम खोल कपाट देखो
हर्षित कर जाते जो पल याद कर देखो
भर कर उत्साह तुम प्रयास कर देखो
छूकर ऊंचाई को आभास कर देखो
जीवन में नया प्रकाश तुम देखो

गहरे सागर में गोताखोर सा बन देखो
बहती नदी में लहर से लहरा कर देखो
रेगिस्तान में बहार का पैगाम बन देखो
कांटों भरे पेड़ पर गुलाब सा बन देखो
अब तुम सुनहरा भविष्य देखो
घनघोर घटा बीच तुम रवि बनकर देखो

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Neha
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