"जीवन में हम"

दो शरीर एक श्वांस हैं हम,
एक दूजे के खास हैं हम।

दूर भले हम कितने रह लें,
दिल के मगर अति पास हैं हम।

प्रेम-सुधा उर में भर घूमें,
राधा-कृष्ण के दास हैं हम।

निज जीवन गर मानसरोवर,
समझिये फिर आकाश हैं हम।

अगर ज़िन्दगी पार्वती तो,
शंकर के उच्छवास है हम।

इक-दूजे का बनें आसरा,
जीतें सदा विश्वास हैं हम।

तिमिर घिरा हो चाहे कितना,
रवि के जैसा प्रकाश हैं हम।

*प्रशांत शर्मा ‘सरल’,नरसिंहपुर

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 31

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share