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“जीवन में हम”

*प्रशांत शर्मा

*प्रशांत शर्मा "सरल"*

गज़ल/गीतिका

May 24, 2017

दो शरीर एक श्वांस हैं हम,
एक दूजे के खास हैं हम।

दूर भले हम कितने रह लें,
दिल के मगर अति पास हैं हम।

प्रेम-सुधा उर में भर घूमें,
राधा-कृष्ण के दास हैं हम।

निज जीवन गर मानसरोवर,
समझिये फिर आकाश हैं हम।

अगर ज़िन्दगी पार्वती तो,
शंकर के उच्छवास है हम।

इक-दूजे का बनें आसरा,
जीतें सदा विश्वास हैं हम।

तिमिर घिरा हो चाहे कितना,
रवि के जैसा प्रकाश हैं हम।

*प्रशांत शर्मा ‘सरल’,नरसिंहपुर

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Author
*प्रशांत शर्मा
नेहरूवार्ड नरसिंहपुर गुलाब चौराहा दीनदयाल स्कूल
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