कविता · Reading time: 1 minute

जीवन में तन्हाई

न दे खुदा
किसी को
तन्हाई
करीब होते
हुए भी
वो हो जाते है
बेगाने

तन्हा
जिन्दगी का
सफर
उम्मीद बस
मिलन

अच्छी लगती है
अब तन्हाई
न मिला
साथ उनका
न कोई यादें
कन्हाई

अलग ही
मजा होता है
जीने में
तन्हाई में
न भूख
न प्यास
बस
इन्तजार

स्वलिखित
लेखक संतोष श्रीवास्तव भोपाल

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लेखन एक साधना है विगत 40 वर्ष से बाल्यावस्था से होते हुए आज लेखन चरम पर है । यूनियन बैंक मे कार्यरत के दौरान बैंक के मैगज़ीन, भारतीय रिजर्व बैक…
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