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जीवन में कुछ खोया भी —– गज़ल

निर्मला कपिला

निर्मला कपिला

गज़ल/गीतिका

August 11, 2016

जीवन में कुछ खोया भी
लेकिन ज्यादा पाया भी

नफरत की चिंगारी फेंक
लोगों ने भड़काया भी

उसके शिकवे सुन कर कुछ
अपना दर्द सुनाया भी

मुझ को डमरू समझे लोग
सब ने खूब बजाया भी

कहना कुछ बेकार लगा
शिकवा होठों पर आया भी

उड़ते उड़ते बात उड़ी
इतना राज छुपाया भी

पहले बोला गुस्से में
फिर उसने बहलाया भी

गुस्सा उस पर आया भी
पर दिल को समझाया भी

मंदिर मस्जिद जो देखा
सर को वहाँ झुका्या भी

होठों पर मुस्कान रही
आंसू पर छलकाया भी

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Author
निर्मला कपिला
लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण... Read more
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