Sep 16, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

जीवन में आया नवल बसंत

जीवन मे आया नवल वसंत
खुशियो की कोकिल कूंक रही
हो रहा पतझड दुखो का अंत
जीवन मे आया नवल वसंत
गुंथी माला भ्रमर युग्म का
कलियां स्मित हो हर्षायी
मुदित हो रहा दिग दिगंत
जीवन मे आया नवल वसंत
प्रकृति खुशी मे फूल रही है
नव लतिका भी झूल रही है
पा गयी काम सा कंत
जीवन मे आया नवल वसंत
हरियाली है धरा पर छायी
देख पवन महकी सुख पायी
कोयल प्यारी कूंक लगायी
सब हो रहा दुखो का अंत
जीवन मे आया नवल वसंत

विन्ध्यप्रकाश मिश्र

62 Views
Copy link to share
Vindhya Prakash Mishra
343 Posts · 27.6k Views
Follow 12 Followers
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै... View full profile
You may also like: