कविता · Reading time: 1 minute

*”जीवन पथ”*

*”जीवन पथ”*
जीवन पथ का पथिक हूँ मैं ,
हिम्मत से आगे घुटनों के बल बढ़ता रहा ,
आंधी आये या तूफानों में खड़ा रहा ,
मंजिल पे अडिग डटे ही रहा ,
*जीवन पथ का पथिक हूँ मैं*
संघर्षो से उलझते हुए भी सुलझता रहा ,
कंटक शूल लाखो बिछे हुए फूल बन गए ,
सिर पर जिम्मेदारी का बोझ ढोते रहा ,
आत्म शक्ति विश्वास लिए हुए ,
निडर निर्भय होकर रेंगता चलता ही रहा ,
*जीवन पथ का पथिक हूँ मैं.*
रिश्ते नाते फर्ज निभाते संबंध बनाते रहा ,
जिम्म्मेदारी कर्त्तव्य अदा करता रहा ,
मौन शांत चिंतन मन गूढ़ रहस्य लिए ,
रीढ़ की हड्डियों को मजबूत बनाता ही रहा ,
सुख की अनुभुति पाने स्वयं आगे ही बढ़ता रहा।
*जीवन पथ का पथिक हूँ मैं.*
कभी रुकता नही झुकता नही आगे बढ़ता रहा ,
सत्य राह पे चलकर फर्ज निभाता रहा ,
हार न माने कभी वो जीत हासिल ,कर आगे कदम उठाता रहा ,
सिर पे जिम्म्मेदारी बोझ तले भी दबकर ,
कभी न आहे भरता कर्म पथ पर आगे ही चलते रहा।
दूसरों की ख्वाहिशों की खातिर पसीना बहाते हुए,
जीवन पथ आसान करता ही रहा।
*जीवन पथ का पथिक हूँ मैं.*
निरन्तर चलते ही आगे कदम बढ़ाता रहा ,
कभी न थकता कभी न रुकता चलता रहा ,
जीवन पथ निर्माण कार्य सुगम बनाने सही राह दिशाओं में कदम उठाते रहा।
जय श्री कृष्णा जय श्री राधेय 🙏
*शशिकला व्यास*✍️

2 Likes · 4 Comments · 32 Views
Like
341 Posts · 24.6k Views
You may also like:
Loading...