कविता · Reading time: 1 minute

‘अंतरंग अर्द्धाङ्गनी’

अंतर्मन अंतरंग,
तुम मेरी जीवन तरंग,
पुष्पित नंदनवन,
तुम मेरी सुमधुर गंध|
अंग अंग सुकांति,
अनवरत मेरी शांति,
व्योम-क्षिति मिलन,
तुम प्रिय विश्रांति|
पल पल चहल पहल,
तुम मेरी शुभेक्षा,
समय सिहर उठे प्रहर,
तुम मेरी अपेक्षा|
जीवन निरंक ‘मयंक’
बिन मेरी संगिनी,
अर्द्ध अंग संग संग
तुम मेरी अर्द्धाङ्गनी|
✍ के. आर. परमाल ‘मयंक’

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