जीवन धारा

होता है जीवन-मरण, तो ईश्वर के हाथ
जाते हैं बस कर्म ही, सदा हमारे साथ

यश-अपयश का ध्यान रख, करना कोई कर्म
वक़्त बदलता ही रहे,गर्म कभी तो नर्म

रिश्तों में होता नहीं, हानि-लाभ का काम
लग सकता है प्यार का, कभी न कोई दाम

08-08-2020
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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