"जीवन क्या है"

जीवन में सबसे पहले हम बालावस्था से परिचित होते हैं उसके बाद यौवनावस्था में कदम रखते हैं और फिर वो दिन भी आता है जब अपनी दहलीज पार कर हकीकत की दुनिया में प्रवेश करते हैं ।

“जीवन क्या है”

बचपन से बड़े हुए ,
उन्माद में भरे हुए ,
सपने आंखों में लिए हुए
जीवन क्या है ये ना जाना था
मन उमंगों का खजाना था

जवानी का वोह दौर भी
कुछ कर गुजरने की होड़ थी
कल्पनाओं के पंछी उड़ते थे
खुद को हम, सितारे जैसे लगते थे

आया वो दिन जब टूटी कल्पना सारी,
दुनिया की हकीकत को, जाना हमने बारी बारी
तब से अब तक, सीखते आए हैं
या फिर , यूँ कह लीजिए
कल्पनाओं में फिर से जीते आए हैं।

✍वैशाली
21.11.2020

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मुझे हिंदी में काफी रूचि है. विदेश में रहते हुए हिन्दी तथा अध्यात्म की तरफ...
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