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"जीवन की परिभाषा"

जीवन की परिभाषा ,
धुमिल होती जाती है |
अधियारा उजाले पर ,
हर पल छाता जाता है|
कोई करे उद्धार हमारा,
मानव निश दिन खोता जाता है |
स्वार्थ का तांडव ,
हर दिशा दिखाई देता है |
आदर्शों की शिक्षा,
व्यर्थ दिखाई देती है |
जीवन की परिभाषा ,
धुमिल होती जाती है|
सत्कर्मो से दूरी ,
हर क्षण बढती जाती है|
सिद्धांतहीन जीवन ,
हर तरफ दिखाई देता है |
फूलों को अब ,
काँटो सी चुभन होती है |
कलियों को अब,
हर पल विपद्द दिखाई देती है|
जीवन की परिभाषा ,
धुमिल होती जाती है |

…निधि…

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डा0 निधि श्रीवास्तव
डा0 निधि श्रीवास्तव "सरोद"
112 Posts · 4.7k Views
"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"