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***जीवन का अनुभव - एक सीख***

व्यक्ति जितना उम्र के पड़ाव को पार करता जाता है उतना ही उसे अनुभव प्राप्त होता जाता है | कुछ अनुभव कड़वे होते हैं और कुछ मीठी | वक्त के साथ-साथ स्थिति परिवर्तित होती रहती है और जीवनशैली में भी उतार चढ़ाव आते रहते हैं | जीवन के आज तक के अनुभव से मैंने एक शिक्षा अवश्य प्राप्त की है कि वक़्त चाहे जैसा भी आए हौंसले हमेशा मजबूत रखने चाहिए; क्योंकि जीवन में जिसने मुश्किल में हौसले खोए हैं उन्हें हमेशा हार का या तकलीफ का सामना करना पड़ा है |जरूरी नहीं है हौसलों से त्रस्त जो हुआ है विफल वही हुआ है बल्कि कुछ ऐसे भी व्यक्तित्व है जिनके हौसले बुलंद होने पर भी उन्हें पराजय हासिल हुई है | हो सकता है हर कदम पर आप को एक अलग तरह के व्यक्तित्व वाले व्यक्ति का सामना करना पड़े मगर अपने ऊपर अडिग विश्वास रखना है | सर्वश्रेष्ठ न होते हुए भी अपने आप को श्रेष्ठ समझना है दूसरों को अपनी कमियों से नहीं अपनी ताकत से अवगत कराना है | आपसे जो द्वेष और ईर्ष्या रखते हैं उन्हें यह बताना है कि बुराई दूसरों में ढूंढने से पहले स्वयं के भीतर नजर डाल कर देखें अगर उन्हें स्वयं में कोई बुराई नहीं नजर आती तो उन्हें अवगत कराना है कि स्वयं वही सबसे टूटा हुए और हारे हुए मानुष हैं |हो सकता है आपकी तरक्की में रुकावटें बहुत आए हर कदम पर आएं परंतु अगर आप मेहनती कर्मठ और ज्ञानी हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आप के मार्ग में बाधक नहीं बन सकती |अच्छी सोच रखो ,कार्य के प्रति वफादार रहो ,कार्यस्थल को मंदिर समान समझो रास्ते खुद-बखुद आसान होते जाएंगे | छोटी से छोटी सफलता को भी सर्वोपरि स्थान दो | सीढ़ी चढ़ने के लिए पहले पहली पायदान पर ही पद रखा जाता है ;जो सीधे आखिरी पायदान पर चढ़ने की कोशिश करते हैं वह सीढ़ी से तो हाथ धोते ही हैं अपितु स्वयं को भी नुकसान पहुंचाते हैं | सफलता की पहली सीढ़ी ही अंतिम सीढ़ी तक पहुंचाती है |
याद रखना मीठी वाणी ,सरस व्यवहार ,प्रखर बुद्धि , तेजस्व व्यक्तित्व और ज्ञान ज्योति के साथ जो आगे बढ़ा है उसी का भविष्य उज्ज्वल और सफल हुआ

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डॉ. नीरू मोहन 'वागीश्वरी'
डॉ. नीरू मोहन 'वागीश्वरी'
दिल्ली
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व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र...
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