.
Skip to content

जीवन एक व्यापार हो गया ।

drpraveen srivastava

drpraveen srivastava

कविता

August 30, 2017

कविता –जीवन एक व्यापार हो गया ।
जीवन एक व्यापार हो गया ,
कृषक मौन , घर –द्वार बह गया ।
दाने –दाने को तरसे भाई ,
कातर नयनों से ताके काकी ।
शिशु रोवें , दुलरावे काकी,
काकी का संसार बह गया ।
जल जीवन मे , माटी का घर बार बह गया ।
जीवन एक व्यापार हो गया ।
वोट बैंक का राज हो गया ,
दाने –दाने तरसे दाता ,
नेताओ की हुई पौ –बारह ,
घोषणाओ का राज हो गया ।
जीवन एक व्यापार हो गया ।
29-08-2017 डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
सीतापुर ।

Author
Recommended Posts
जीवन एक व्यापार हो गया
जीवन एक व्यापार हो गया जीवन एक व्यापार हो गया , कृषक मौन , घर –द्वार बह गया । दाने –दाने को तरसे भाई ,... Read more
कविता
बेटियां खुशी का पर्याय होती है बेटियां जीवन का अहसास होती है बेटियां खिलौनो में टूटती, समाज से लड़ती, घर का श्रंगार होती है बेटियां..... Read more
दहशत है व्यापार  (दोहे )
क्या समझेंगे बेअदब, .होता है क्या प्यार ! जिनका जीवन जुल्म है, दहशत है व्यापार !! नकदी की तंगी बढ़ी, ..सुस्त पड़ा व्यवसाय ! घातक... Read more
मेरा जीवन (कविता)
मेरा जीवन (कविता) यह जीवन भी कोई जीवन है , जैसे पेड़ से टुटा हुआ फूलें। जिसे जब चाहे कोई भी , कुचल कर चला... Read more