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जीवनी स्थूल है/सूखा फूल है

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

February 17, 2017

जीवनी स्थूल है
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
ईश्वर पत्थर में पर पाते सदा वह फूल है |
आचरण का बल तथा जित ज्ञान-प्रेमी तूल है |
उसी दर पर लोग आएंगे सदा सद्बोधहित|
चले जो विपरीत उसकी जीवनी स्थूल है |

सूखा फूल है
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
प्यार बिन सारा जगत स्थूल है |
प्रीति,पोषक जल भरी शुभ गूल है |
लहलहाओगे न तुम, सद्हर्ष बिन |
प्रेम बिन उर-फसल सूखा फूल है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more

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