मुक्तक · Reading time: 1 minute

जीवनी स्थूल है/सूखा फूल है

जीवनी स्थूल है
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
ईश्वर पत्थर में पर पाते सदा वह फूल है |
आचरण का बल तथा जित ज्ञान-प्रेमी तूल है |
उसी दर पर लोग आएंगे सदा सद्बोधहित|
चले जो विपरीत उसकी जीवनी स्थूल है |

सूखा फूल है
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
प्यार बिन सारा जगत स्थूल है |
प्रीति,पोषक जल भरी शुभ गूल है |
लहलहाओगे न तुम, सद्हर्ष बिन |
प्रेम बिन उर-फसल सूखा फूल है |

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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1) प्रकाशित कृतियाँ 1-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" काव्य संग्रह 2-"क्रौंच सु ऋषि आलोक" खण्ड काव्य/शोधपरक ग्रंथ 3- "पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं" काव्य संग्रह उक्त तीनों कृतियाँ सम्पूर्ण विश्व…
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