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जीने के बहाने ढूढ़ लेती है जिंदगी

NIRA Rani

NIRA Rani

कविता

October 20, 2016

एक जिदगी कई फसाने ढूढ़ लेती है .
कुछ अच्छे तो कुछ बुरे अफसाने गढ़ लेती है
कभी किसी उम्मीद मे घुलकर
रंगीन हो जाती है जिंदगी
तो कभी किसी दर्द मे डूबकर
तार तार हो जाती है जिंदगी
कभी परियों के देश मे ले जाती है
कभी सच से परिचय कराती है
कभी बेमानी सी तो कभी अमूल्य हे जाती है
सच!! जीने के सौ बहाने ढूढ़ लेती है ये जिंदगी

Author
NIRA Rani
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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