जीने की कला

हार नहीं मानी कभी , जीती है हर जंग।
तेज़ हवाएँ भी चली , उड़ती रही पतंग।।

सुख – दुख का संगम कहूँ , इस जीवन को मीत।
धूप मिले या छाँव हो , गा मस्ती के गीत।।

आशा ही उत्साह दे , सच्ची इसकी प्रीत।
जैसे सुर के मेल से , मधुर बने हर गीत।।

शब्द – शब्द में है छिपा , मद आनंद अपार।
मानव तू बस सीख ले , शब्दों का व्यवहार।।

कण – कण में सौंदर्य है , करनी है पहचान।
मिट्टी में ज्यों जल गिरे , सौंधेपन का भान।।

इंद्रधनुष के रंग हैं , समझो मत तुम भार।
मस्ती प्रेम लिए चलो , जीवन गंगा धार।।

प्रीतम हँसना सीखिए , सौ की इक ही बात।
चैन पड़े ना शत्रु को , सोचेगा दिन रात।।

💐आर.एस.प्रीतम💐
नोट – सुरक्षित रहो , घर में रहो।

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प्रवक्ता हिंदी शिक्षा-एम.ए.हिंदी(कुरुक्षेत्रा विश्वविद्यालय),बी.लिब.(इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय) यूजीसी नेट,हरियाणा STET पुस्तकें- काव्य-संग्रह--"आइना","अहसास और ज़िंदगी"एकल...
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