गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

जीने का मजा नहीं है

२१२२ २१२२ २१२१ २२
सुशील यादव

साथ मेरे हमसफर वो साथिया नही है
लुफ्त मरने में नहीं ,जीने का मजा नहीं है

रूठ कर चल दिए तमाम सपने- उम्मीद
इस जुदाई जिन्दगी का जायका नहीं है

साथ रहता था बेचारा बेजुबान सा दिल
ठोकरे, खामोश खा के भी गिना नहीं है

आ करीब से जान ले, खुदगर्ज हैं नही हम
फूल से न रंज, कली हमसे खपा नहीं है

शौक से लग जो गया, उनके गले तभी से
लाइलाज ए मरीज हूँ, मेरी दवा नही है

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