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जीने का ढंग

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

कविता

November 14, 2016

जब कभी भी देखता हूँ ,
इस फैले आकाश में
करते हुए स्वच्छंद विचरण
पक्षियों के झुण्ड को ।
तो,मन कुछ चाहता है,सीखना ,
मसलन एकता ,
या केवल एकता ।
नयन कुछ चाहते हैं देखना
मसलन हरियाली
या केवल हरियाली ।
आत्मा कुछ चाहती है गाना
मसलन प्रेम
या केवल प्रेम ।
तब ,यह देह भी
कुछ चाहती है ओढ़ना
मसलन सहजता
या केवल सहजता ।
क्यों ? होता है ऐंसा ।
जब कभी भी देखता हूँ
इस फैले आकाश में
करते हुए स्वच्छंद विचरण
पक्षियों के झुण्ड को ।
शायद ! इसलिए-कि
बेज़ुवानों से भी हम
सीख सकते हैं
जीने का ढंग ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
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