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जीना नहीं तेरे बिना

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 12, 2017

जब से साथ तुम्हारा पाया जब से तुम्हें पहचाना।
तुमने मुझे सिखाया किसे कहते हैं साथ निभाना।।
दुख की परछाई हो या हो मुसीबतों के अंधेरे।
इनसे पहले ही आ जाते तुम्हारे सहारों के घेरे।।
पल पल का यह अपनापन मुझको देता है जीवन।
साथ तुम्हारा मांगे मेरी हर सांस की आवन-जावन।।
मेरी उमर भी लग जाए तुमको छूने न पाएं बलाएं।
हर क्षण हर पल मेरा दिल देता है तुमको दुआएं।।

—रंजना माथुर दिनांक 28/02/2015
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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