Jan 7, 2020 · मुक्तक
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जीना तुम ऐसे

कभी दिनकर की किरणों मे, कभी बादल की छांवोंं मेंं
कभी उन तंग गलियों में, कभी खुशहाल गाँवों मेंं
बिता के चार दिन इस जिन्दगी के जाना तुम ऐसे
फिजां मे याद हो तेरी, महक हो इन हवांओ मेंं।
-जटाशंकर”जटा”
दिनांक ०४-०१-२०२०

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Jatashankar Prajapati
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ग्राम-सोन्दिया बुजुर्ग पोस्ट-किशुनदेवपुर जनपद-कुशीनगर उत्तर प्रदेश मो०नं० 9792466223 --शिक्षक ---पत्रकार ---कवि View full profile
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