जीत

मनहरण घनाक्षरी — जीत

बहती धारा के साथ,
किनारे चल छोड़ के।
रखे यकीं खुद पर,
दम तो दिखाओगे।

बिना लक्ष्य मंजिल के,
हासिल कैसे मिले जी।
बीच मझधार में तो,
फँस तुम जाओगे।

खेलों खेल भावना से,
जीत ले दिल लोगों के।
खेल अच्छा खेलकर,
पदक तू पाओगे।

झंडा गाड़ दे जीत के,
कर दे नाम रोशन।
देश के वो लाल मेरे,
मान को बढ़ाओगे।
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रचनाकार डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”
पिपरभावना, बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822

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