Jun 27, 2016 · कविता

जीत तय हुआ

जीत तय हुआ …..
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प्रातः विहग चहक सुन सुन कर
जग जीवन संगीत मय हुआ ।
सामष्टिक नूतनता लेकर
नव जीवन का गीत तय हुआ ।।

मंद सुगन्धित पवन के झौंके
आत्मा को पुलकित कर जाती ।
सृष्टि की नीरवता लेकर
आज नया एक रीत तय हुआ ।।

मन उर और ऊर्जा के मिलन का
अत्यन्तिम एक भीत तय हुआ ।
नया जोश लेकर दुनियाँ में
न्याय धर्म और प्रीत तय हुआ ।।

अपनेपन से ओत प्रोत सब
सत्य न्याय की भीड़ तय हुआ ।
अद्भुत कुछ प्रस्ताव को लेकर
न्याय रूपी अमृत तय हुआ ।।

न्याय ही तो जीवन्त धर्म है
न्याय धर्म का मीत तय हुआ ।
बिन शास्त्रों से ही दुनियाँ में
अन्यायों पर जीत तय हुआ ।।

सामरिक अरुण
NDS झारखण्ड
06/04/2016
www.nyayadharmsabha.org

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अहम् ब्रह्मास्मि
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