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जीतने का जूनून

Sonika Mishra

Sonika Mishra

कविता

October 14, 2016

आसमां क्या चीज़ है
वक्त को भी झुकना पड़ेगा
अभी तक खुद बदल रहे थे
आज तकदीर को बदलना पड़ेगा
अधूरी कहानी छोड़ने की
आदत नहीं है मुझे
दिल पर बोझ झेलने की
चाहत नहीं है मुझे
किसी की ख़ुशी क लिए
मंज़िल बदलते रहे है हम
कुछ कदम ही दूर थे मंज़िल से
पर रास्ता भटकते रहे है हम
मिलना नहीं था कुछ
उन राहों पर चल रहे थे हम
खुद के सपने भी
औरो की आँखों से बुन रहे थे हम
आज फिर दिल कुछ हैरान सा है
मेरी बेवकूफियों से परेशान सा है
शायद इस दिल को सुकून चाहिए
आज फिर इसे जीतने का जूनून चाहिए
– सोनिका मिश्रा

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Author
Sonika Mishra
मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||

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