जीजा-साली [कहानी ]

जीजा-साली (
नीना अपनी पति की आशिक मजाजी से बहुत परेशान थी. परिवार को मिलने आई साली पर नजर थी जो ल .ल.एम् में दाखिला लेने आई थी ,उनके यहाँ ठहरी हुई थी.पति कोई न कोई बहाना तलाश कर उसे इम्प्रेस करते. मेरी बहन हया भी मुस्कराती रहती जीजू की खूब तारीफ करती रहती ,दोनों में काफी निकटता सी हो गई. नीना के लिए चिन्ता का विषय बनता जा रहा था ,समझ नही पा रही थी क्या करे ?.होली दहन पूजा होनी थी ,सभी सगे-सम्बधी ,पड़ोसी जमा हुए ,खूब खुशी ओर गुलाल उड़ाने का माहौल बना हुआ था ,तभी नीना के पति जोश में साली को पकड़ नाचने लगे ओर खिंच -खिंच बदहवास से हो गये .तभी मामा जी को गुस्सा आया ओर दोनों को अलग करते पति को बोले,’ क्या अधिक भांग चढा ली जो पत्नी ओर साली की पहचान भूल गया’. .नीना को साथ नाचने को कह हया को डांटा रिश्ते सीमा में ही सुहाते है नीना की मानो पूजा सफल हो गई ,कभी जीजा साली का चेहरा कभी पूजा में हाथ जोड़ रही थी.रेखा मोहन ६/३/२०१७

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