Skip to content

जीजा-साली [कहानी ]

rekha mohan

rekha mohan

लघु कथा

March 6, 2017

जीजा-साली (
नीना अपनी पति की आशिक मजाजी से बहुत परेशान थी. परिवार को मिलने आई साली पर नजर थी जो ल .ल.एम् में दाखिला लेने आई थी ,उनके यहाँ ठहरी हुई थी.पति कोई न कोई बहाना तलाश कर उसे इम्प्रेस करते. मेरी बहन हया भी मुस्कराती रहती जीजू की खूब तारीफ करती रहती ,दोनों में काफी निकटता सी हो गई. नीना के लिए चिन्ता का विषय बनता जा रहा था ,समझ नही पा रही थी क्या करे ?.होली दहन पूजा होनी थी ,सभी सगे-सम्बधी ,पड़ोसी जमा हुए ,खूब खुशी ओर गुलाल उड़ाने का माहौल बना हुआ था ,तभी नीना के पति जोश में साली को पकड़ नाचने लगे ओर खिंच -खिंच बदहवास से हो गये .तभी मामा जी को गुस्सा आया ओर दोनों को अलग करते पति को बोले,’ क्या अधिक भांग चढा ली जो पत्नी ओर साली की पहचान भूल गया’. .नीना को साथ नाचने को कह हया को डांटा रिश्ते सीमा में ही सुहाते है नीना की मानो पूजा सफल हो गई ,कभी जीजा साली का चेहरा कभी पूजा में हाथ जोड़ रही थी.रेखा मोहन ६/३/२०१७

Share this:
Author
rekha mohan

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you