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जीऊतपुत्रिका व्रत

पं.संजीव शुक्ल

पं.संजीव शुक्ल

कुण्डलिया

September 13, 2017

??????माँ??????

माँ बच्चों के दिर्घायु को रखती है उपवास।
जीऊतपुत्रिका व्रत यह महिमा अगम अपार।।
महिमा अगम अपार, व्रत निर्जल ही रहती।
हर बाधा से लड़ती मुश्किल हस कर सहती।।
अपने बच्चों की खातिर हो अटकी जिसकी जां।
इस धरती पर एक शख्सियत कहते उसको माँ।।
पं.संजीव शुक्ल “सचिन”
आप सभी महानुभावों को जीऊतपुत्रिका व्रत की कोटिशः हार्दिक शुभकामनाएं।।

Author
पं.संजीव शुक्ल
मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।
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