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**** जिस्म छलनी हो गया ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

शेर

October 25, 2017

25.10.17 ** रात्रि ** 10.30

जिस्म छलनी हो गया है दिल का अब क्या पता

किस-किस ने अब मुझको है छला अब क्या पता।।

?मधुप बैरागी

25.10.17 ** रात्रि ** 9.51

आजकल ईमानदार होना गुनाह हो गया है

आज गुनहगार फिर से बेगुनाह हो गया है ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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