कविता · Reading time: 1 minute

जिसे चाहा दिल से पूजा

कोमल सा नाजुक दिल में,
तन्हाई की खंजर चुभा है।
यादो कइ गहरा समुन्दर में,
मेरा दिल डूबा है।

वो तितली दूर उड़ चली,
दिल की उपवन उजड़ा है।
न मधु-माह न सावन,
ज़िन्दगी की हर दिन खज़ा है।

चाहत का चाँद डूब गया ,
खुशियाँ ज़िन्दगी से छूमंतर है
प्यार की शमा बुझ गई,
ज़िन्दगी मेरा अँधेरा है।

इश्क की महल ढह गई,
जहा सारा मेरा खंडहर है।
सफर ज़िंदगी की कठिन हुआ,
अब हर राह जर्जर है।

उम्मीद का शाम ढल गया,
आँखे सुबह शाम तर है।
जिसे चाहा दिल से पूजा
वो किसी गैर का है।

बाँवरा मन दिल आवारा है
सूना जहां मेरा सारा है।
सोच के हैंरा हूँ मै,
ऐसी ज़िन्दगी का नज़ारा है।

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