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जिसको तन्हाई में ही गाता हूँ

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

September 12, 2017

ग़ज़ल
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रब के मैं बारगाह में जाता हूँ
जब कभी तन्हा खुद को पाता हूँ

हाथ उठते हैं जब दुआओं में
समने मैं खुदा को पाता हूँ

जल्द बीमार को शिफ़ा दे दे
तेरे सदके में सर झुकाता हूँ

ख़्याल रख कर मैं नन्हे बच्चे का
दस्ते-फ़रियाद मैं उठाता हूँ

ठीक बीमार को तू कर कान्हा
फूल अश्क़ों के मैं चढ़ाता हूँ

सुन ले फ़रियाद हम ग़रीबों की
अर्ज़ मैं बस यही लगाता हूँ

जान तुम तो हो मेरा वो नग़्मा
जिसको तन्हाई में ही गाता हूँ

देख कर दुनिया को मसर्ररत में
खुद को भी मैं खुशी में पाता हूँ

लौट कर आ जा ऐ मेरे “प्रीतम”
देख रो कर तुझे बुलाता हूँ

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती उ०प्र०)
09/09/2017

Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
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