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जिसके जान से ही मेरी पहिचान है

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

गज़ल/गीतिका

July 11, 2017

जिसके जान से ही मेरी पहिचान है,
तुम नही तो दिन मेरा सूनसान है।
नजरे है कटीली दिलपर आ लगी,
आंखे तो उसकी पूरी धनुष का बान है।
आने लगी हवा के झोके से पास मे,
सब जानते है वो मेरी दिल ओ जान है।
आवाज दे रहा हूं करीब आओ तुम,
वो तो मेरी सुबह की पहली अजान है।
छेड़ दोगे मेरे तंत्री को जब कभी,
निकले जो स्वन वो सुंदर सी गान है ।
विन्ध्यप्रकाश मिश्रा

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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