Jul 1, 2016 · कविता
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!~जिन्दा लाश~!

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!~जिन्दा लाश~!
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“मरी आदमियत संग –

लाशें
जिन्दा हैं!

स्वार्थ
जिन्दा है!

ज़ज्बात
शर्मिंदा है!!”___दुर्गेश वर्मा

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Durgesh Verma
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मैं काशी (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ । काव्य/गद्य आदि विधाओं में लिखने का मात्र... View full profile
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