गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

जिन्दगी

जिन्दगी हँसते हुए हुए ही आज चलनी चाहिए
ये उमर भी काम को करते हुए कटनी चाहिए

मत करे अभिमान अपने रूप पर तू आज तो
एक दिन काया सलोनी यूँ ही ढलनी चाहिए

गैल चलती हो लटों झटका के पानी आज जो
मनचलों पर दामिनी तो आज गिरनी चाहिए

जब नटी सी वो कमर मटका चली जाये कभी
चाल उसकी तो तभी तो फिर संभलनी चाहिए

सिर रखे गागर सुकोमल जल भरन को जब चली
मृग हिरणी सी उछल आगे टहलनी चाहिए

डॉ मधु त्रिवेदी

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डॉ मधु त्रिवेदी शान्ति निकेतन कालेज आफ बिजनेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइंस आगरा प्राचार्या, पोस्ट ग्रेडुएट कालेज आगरा *************** My blog madhu parashar.blogspot.in Meri Dunia कोर्डिनेटर * राजर्षि टंडन ओपन…
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