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*जिन्दगी*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

गज़ल/गीतिका

August 5, 2016

ईश्वर का उपहार जिन्दगी
एक निराला प्यार जिन्दगी
साहस और लगन मत छोड़ो
इन का है शृंगार जिन्दगी
हरदम खुशबू तुम बिखराओ
है फूलों का हार जिन्दगी
गीत सुहाने गाते जाओ
वीणा की झंकार जिन्दगी
गम से अब तो नाता तोड़ो
खुशियों की भरमार जिन्दगी
गर न वक्त के साथ चलो तो
बन जाती है खार जिन्दगी

*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
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