कविता · Reading time: 1 minute

जिन्दगी से हाथ धोने से भला अच्छा यही!

*जिन्दगी से हाथ धोने से भला अच्छा यही।*

जिन्दगी से हाथ धोने से भला अच्छा यही
खुद से अपने हाथ धोवें सबको समझावें सही
ना छुयें चेहरा स्वयं का तय ये कर लेवें सभी
संक्रमित से माहिरों ने तीन फुट दूरी कही

जिन्दगी से हाथ धोने से भला अच्छा यही ।
छींकने औ खांसने में स्वच्छ कपड़ा रख सही
कुछ दिनों को तप करें रह कर सभी जन स्वग्रही
स्वच्छ हो परिवेश तन मन स्वस्थ हो पूरी मही

जिन्दगी से हाथ धोने से भला अच्छा यही ।

*अनुराग दीक्षित*

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