.
Skip to content

जिन्दगी को गुजार दो

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

April 4, 2017

????
जिंदगी को गुजार दो
खिलखिलाते हँसते हँसते।
न जाने किस वक्त,कब कहाँ,
जिंदगी निकल जाए
हाथ से फिसल के।
बहुत नज़दीक से देखा है
जिंदगी को तड़पते बिलखते।
एक पल में कांटा है जिंदगी
दूसरे ही पल फूल खिलखिलाते।
वो जिंदादिल है जो
हर हाल में मुस्कुराते
????—लक्ष्मी सिंह ??

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
रूला देती है जिंदगी
कभी हँसते हँसते रूला देती है जिंदगी, कभी रोते रोते हँसा देती है जिंदगी| अपना है कोन पराया है, मुस्किल मे बता देती है जिंदगी||... Read more
**** जिंदगी ***
[[[[ ज़िंदगी ]]]] दिनेश एल० "जैहिंद" ये जिंदगी क्या है....? पल दो पल का खेला है !! ये दुनिया क्या है....? पल दो पल का... Read more
मैं और मेरी जिंदगी
,हंसती खिलखिलाती सी जिंदगी अक्सर यूं ही रूठ जाया करती है दिखाकर सप्तरंग सपने श्वेत श्याम हो जाती जिंदगी भाग जाती छूट जातीमेरे हाथों से... Read more
* सफर जिंदगी का *
Neelam Ji कविता Jun 20, 2017
आसां नहीं सफर जिंदगी का हर पल इम्तेहाँ होता है । दिल जान लगा दे जो अपनी वही इंसान कामयाब होता है । सफर ये... Read more