जिन्दगी के पन्ने

जिन्दगी की किताब के पन्ने
आज जब मै उलटने लगा
लम्हा लम्हा गुजरा समा
मै दुबारा जीने लगा ।

उम्र की यादों मे कैद
हर इक पन्ना
कभी मुझे हंसाने
और कभी रूलाने लगा ।

लौटकर आता नही गुजरा जमाना
समय की स्याही से
अंकित हर इक अमिट पन्ना
कभी चिढ़ाने कभी समझाने लगा ।

वक्त की चालों से अनजान
आदत से मजबूर खाली पन्नो मे
अधूरे ख्वाबों का इतिहास
अभी से मै लिखने लगा ।।

राज विग 21.09.2019.

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