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जिन्दगी उजड़ गई..

**^**जिन्दगी उजड़ गई**^**
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जब से तुम आई प्रिय जिन्दगी सवर गई,
जैसे ही तुम गई वो हर खुशी बिखर गई।
रंग जो भरे थे प्रिय कभी तेरे आगमन ने,
जुदा क्या हुये कि मेरी जिन्दगी उजड़ गई।।
©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”

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पं.संजीव शुक्ल
पं.संजीव शुक्ल "सचिन"
नरकटियागंज (प.चम्पारण)
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D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक...
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