कविता · Reading time: 1 minute

जिद़

जिद़ है कुछ कर दिखाने की,
आसमान में सूरज सा चमकने की,
राह भी है, चाह भी है,
कमी है बस थोड़ी हिम्मत जुटाने की,
मंजिल दिख रही है,
कदमों में हलचल हो रही है,
कोशिश है बस पहला कदम उठाने की,
जिद़ है कुछ कर दिखाने की,
आसमान में सूरज सा चमकने की,
हर खुशी कदमों में है,
जीवन में साथ अपनों का है,
कमी है तो बस उन्हें समेटे रखने की,
जिंदगी इम्तेहां ले रही है,
हर पाप-पुण्य का हिसाब लेे रही है,
कोशिश है कुछ अलग से कर गुजरने की
जिद़ है कुछ कर दिखाने की,
आसमान में सूरज सा चमकने की,

गुरू विरक

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