जिंदादिल वीर जवान

उठो, बनो शोले हे ! वीरों,
अब वतन ए राह बुलाती है।
दिखलाओ जिंदादिली प्यारों,
अब वतन ए चाह बुलाती है।।

खौलता है नहीं क्या खूँ अब,
कटे सर सरहद देख करके।
वतन पर सर्वस्व लुटा आये,
हर सर की आह बुलाती है।।

धड़कता है बहुत दिल माँ का ,
तड़पे बहुत जोर -जोरों से।
हिसाब सर का करो, ए बेटों !
ममताएँ अथाह बुलाती है।।

एक सूत छोटा नहीं था तब,
दिया था बेटा वतन को जब।
एक फीट छोटे शहीदों के,
बाप की कराह बुलाती है।।

सुनो ! जिन्दादिल वीर जवानों ,
पुनः जाओ तुम सीमा पार।
आँसू पोछो, शत्रु सर लाके,
जन-जन की वाह बुलाती है।।

सन्तोष बरमैया “जय”

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