Apr 17, 2020 · कविता

जिंदगी

किश्तों में गुज़र रही है देखो ये कितनी इंतेहा कर रही है।
बना कर रख खुद को बेगुनाह तुझको ये आगाह कर रही है।
देखो ये जिंदगी कैसे गुजर रही है…..
समझ लिया इसने सबको मेरे जैसा देखो तो ये कितनी इंतेहा कर रही है।
दिला कर याद गुनाह तेरे तुझसे हर वक्त सवाल कर रही है।
देखो ये जिंदगी कैसे गुजर रही है….
…##🎭💫

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लिखावट है बच्चों जैसी दिल बचपने से भरा। है ख्वाहिशें कुछ यूं ही हमेशा बना...
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