Oct 7, 2018
कविता · Reading time: 1 minute

जिंदगी

बहुत अजीब ज़िन्दगी ने किया है
हमारे साथ यह बर्ताव..
जिसने सिखाई हमें वफ़ा
वो खुद बदचलनी की मिसाल बन गए
जिसने किया था वादा साँसों में बसाने का
उसी ने किसी और की साँसों में खुदको बसाने का इंतज़ाम कर दिया
जिसकी धड़कनों में बसती थी मै
उसने खुद किसी और की धड़कनो में अपना नाम कर दिया
दावा किया था जिसने ज़िन्दगी मेरे नाम करने का
खुद उसने किसी और की ज़िन्दगी में अपना नाम खास कर दिया
बनाया जिसने मुझे अपनी चमक देकर हीरे का
खुद उसकी चमक किसी ने लेके उसे कांच कर दिया
ये सांसें , ये धड़कन , ये आत्मा है उनकी
तो कैसे किसी और को इन्हें सौपने का काम कर दिया
हो जाऊँगी फना उनके नाम से मैं इस जहाँ से
चाहे वो अपनी जान किसी और के नाम कर गया

स्वेता परमार

24 Views
Like
2 Posts · 48 Views
You may also like:
Loading...