Dec 3, 2016 · कविता
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जिंदगी मुझ पर लिखती है

मै जिंदगी पर लिखती हूं
जिंदगी मुझ पर लिखती है
कभी वो मुझ पर अौर
कभी मै उस पर हंसती हूं
मै मॉगू फूलों सी हंसी
तो वो कॉटें भी साथ देती है
मॉगूं जो खुला अासमान
तो पिंजरा भी साथ देती है
है यकीन की इस जहॉ मे
हर चीज जोड़े मे होती है
सुख है तो दुख है .
खुशी है तो गम है
रात है तो दिन है
कभी खुशी मे ऑखे नम है
तो कभी गम ही गम है
मुझे क्यू ये एहसास देती है …
क्यू जिंदगी हर बार छल देती है
चाहूं जो प्यार भरा साथ
तो फासले तय कर देती है
मॉगू जो प्यार का आसमान
तो नफरत का बीज देती है ..
सच मै जिंदगी को लिखती हू
जिंदगी मुझको लिखती है ..

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे... View full profile
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