गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

जिंदगी ने मुझे पाठ पढ़ाया है

जिंदगी ने मुझे पाठ पढ़ाया है
ठोकरों ने मुझे जीना सीखाया है

कदम कदम पर भटकता रहा मैं हर पल
ठोकरों ने मुझे समय के अनुरूप ढलना सीखाया है

समय ने मेरी दुनिया से पहचान करवाई
इंसान का चेहरा पढना मुझे सीखाया है

हर पल तलशता रहा मैं स्वयं में खुद को
जिंदगी ने मुझे स्वयं से अवगत करवाया है

जिंदगी की इस भागम भाग में
मुझे सम्भलना सीखाया है

टूटता रहा हर पल मैं अक्सर ठोकरों से
ठोकरों ने ही मुझे आगे चलना सीखाया है

ठोकरों ने ही कराई है पहचान इंसानों की
वक्त ने ही अपनों और परायों को समझना सीखाया है

जिंदगी ने ही मुझे लड़ना सीखाया है
मुसीबतों से लड़ना और आगे बढना सीखाया है

भूपेंद्र रावत
18/07/2017

1 Like · 82 Views
Like
318 Posts · 27.3k Views
You may also like:
Loading...