जिंदगी तुझे

ज़ज्बात लिखूँ अपने हालात लिखूँ ।
जिंदगी किस तरह तुझे साथ लिखूँ ।

डूबकर तन्हाइयों में अक्सर ,
खुशियों की मुलाक़त लिखूँ ।

जी रही जिंदगी ख़ातिर जिनके,
सपनों के उनकी सौगात लिखूँ ।

न जीतकर भी अपने हालत से ,
जीतने के मैं अपने ज़ज्बात लिखूँ ।

चलता हूँ नमुकम्मिल सा सफर पे ,
मुकम्मिल सफ़र से हालात लिखूँ ।

अपने ज़ज्बात लिखूँ हालात लिखूँ ।
जिंदगी तुझे”निश्चल”विश्वास लिखूँ ।

…. विवेक दुबे”निश्चल”@….

Like Comment 0
Views 4

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing