कविता · Reading time: 1 minute

जिंदगी की पलकों पर

ऐ ज़िंदगी,

हम तो चले थे खुले आसमान में ऊँची
उड़ान भरने,
पर कम्बख़त वक्त ने हवा में उड़ा दिया
तन्हा धुवा जैसे,
बड़े अरमान थे तुझसे ये जिंदगी तेरी पलकों पे
सजने के,
पर तूने तो बहा दिया मासूम आँखों
से छलका के,
नहीं लगता था कभी डर तेरी जलती
आँखों से।
पर आज तो काँप जाती है रूह तेरे मुस्कराने
से।

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शिक्षा – 1. एम ए -अर्थ शास्त्र ,मनोविज्ञान 2.यांत्रिक अभियांत्रिकी 3. डिप्लोमा इन बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफ़िकेट कार्य - शिक्षक , लेखक गायत्री मानस कला(मंच संचालन) भाषा - हिंदी और अंग्रेजी…
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