कविता · Reading time: 1 minute

~*~*~*जिंदगी और हम*~*~*~

जिंदगी और हम
*~*~*~*~*~*~*
“कुछ रास्ते
ढूँढें
जीने के वास्ते,
कुछ सपने
पलकों पर लिए
हँसने के वास्ते!

अजब मंजर
जिंदगी का
इत्तफाकन –
कोहरे की ओट में हमें
आईने में धुँधला शक्ल
दिखलाती है!

तंगहाल हालातों के कैन्वस पर,
तंग गलियारों के
बियाबान से होते,
बचकर वहशी से,
बड़ी तेजी से
गुजर जाती है!!”____दुर्गेश वर्मा

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मैं काशी (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ । काव्य/गद्य आदि विधाओं में लिखने का मात्र प्रयास करता हूँ । समय-समय पर प्रतिष्ठित समाचार पत्र, पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती…
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