Jul 12, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

~*~*~*जिंदगी और हम*~*~*~

जिंदगी और हम
*~*~*~*~*~*~*
“कुछ रास्ते
ढूँढें
जीने के वास्ते,
कुछ सपने
पलकों पर लिए
हँसने के वास्ते!

अजब मंजर
जिंदगी का
इत्तफाकन –
कोहरे की ओट में हमें
आईने में धुँधला शक्ल
दिखलाती है!

तंगहाल हालातों के कैन्वस पर,
तंग गलियारों के
बियाबान से होते,
बचकर वहशी से,
बड़ी तेजी से
गुजर जाती है!!”____दुर्गेश वर्मा

14 Views
Copy link to share
Durgesh Verma
9 Posts · 307 Views
मैं काशी (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ । काव्य/गद्य आदि विधाओं में लिखने का मात्र... View full profile
You may also like: