मुक्तक · Reading time: 1 minute

जिंदगी एक ख्वाब बनके रह गयी

जिंदगी एक ख्वाब बनके रह गयी
आंसू बरसात बनके रह गयी
बहारे पतझड़ के मौसम में ही अटकी रही
जिंदगी अरमानो में ही सिमट के रह गयी

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