जा रहा हूँ मैं

जा रहा हूं मैं
फिर कभी न आऊँगा
तुम ने जिया है हर पल मुझे
मैं तुम्हारे लिए तुम्हारा कल दे जाऊंगा
तुम एक बार पीछे मुड़ कर देखो
जब मैं आया था
तुम मेरा इंतज़ार कर रहे थे आधी रात से ही
नए ख़्वाब बुन रहे थे
अपने इरादों को मजबूत कर रहे थे
मेरे आने पर तुमने मेरे पहले दिन पर खूब मजे किये थे
और फिर धीरे-धीरे गंवाने लगे थे
दिन, सप्ताह ,महीने सब लुटाते जा रहे थे
बिना कुछ किये मुझे बीताते चले जा रहे थे
कुछ तो करना था न तुम्हे
मेरे हर हिस्से में थे तुम
तो तुम मुझे क्यों भूल गए
मैं बीतता साल आज तुमसे
आखिरी पल बाँट रहा हूँ
देखो मैं वक़्त का हिस्सा हूँ
मेरा लौटना तो मुमकिन नहीं फिर
पर तुम मेरे आने वाले कल को संभाल लेना
मैं बीता हुआ साल बन जाऊंगा
पर तुम मुझे गँवाने पर पछताना मत
अपने दुःख-दर्द को भूल कर
अपने आने वाले साल को
भरपूर जीना,और अपने ख़्वाब
जो तुमने देखा था ,सब पूरे करना–अभिषेक राजहंस

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