जान मुझ पे निसार करता है

जान मुझ पे निसार करता है
प्यार वो बेशुमार करता है

सोचकर वो कभी मिलेंगें फिर
रोज दिल इंतज़ार करता है

रंक हो या यहाँ कोई राजा
वक़्त सब का शिकार करता है

पाँव में लग न जाये मेरे वो
दूर राहों से खार करता है

आज कल प्यार की नदी को वो
भूल कर भी न पार करता है

स्वप्न मेरे बिखर न जायें फिर
वो खिजाँ को बहार करता है

आज भी अर्चना की बातों पर
वो बड़ा ऐतबार करता है

डॉ अर्चना गुप्ता

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डॉ अर्चना गुप्ता (Founder,Sahityapedia) "मेरी तो है लेखनी, मेरे दिल का साज इसकी मेरे बाद...
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