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“जादूगर”

किरन मिश्रा

किरन मिश्रा

कविता

February 23, 2017

सुनो जादूगर
खिल उठते हैं मेरेे होंठ,
तुम्हारी चाहत की चाशनी में डूब,
गुलाब की सुर्ख पंखुडी से,
जब भी तुम लिखतेे हो,
मेरे अधरोष्ठों पर,
अपने प्रेम की रसीली कवितावली
और मेरे माथे को चूम,
गहरे आलिंगन में,
करते हो अपने नाम का
मेरे गालों पर प्रेमिल हस्ताक्षर!
और अब तुम कभी,
विलग नहीं होने दोगे मुझे खुद से
पतझड़ हो या वसन्त
हमारी राह इक होगी,
चाह एक होगी बोलो
तुम्हारा वादा है ना जादूगर !!””
किरण मिश्रा
13.2.2017

Author
किरन मिश्रा
"ज़िन्दगी खूबसूरत कविता है,और मैं बनना चाहती हूँ इक भावनामयी कुशल कवियत्री" जन्म तिथि - 28 मार्च शिक्षा - एम.ए. संस्कृत बी. एड, नेट क्वालीफाइड, संप्रति- आकाशवाणी उद्घघोषिका(भूतपूर्व) प्रकाशित कृति- साँझा संकलन "झाँकता चाँद"(हायकु) विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में समय-समय पर... Read more
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